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Sunday, 22 November 2020

#कर्मधारय एवं बहुव्रीहि समास में अंतर#Karmadharaye samas evam Bahuvrihi samas mei antar

#कर्मधारय एवं बहुव्रीहि समास  में अंतर
#Karmadharaye samas evam Bahuvrihi samas mei antar
 

कर्मधारय एवं बहुव्रीहि समासों में अंतर समझने के लिए इनके  विग्रह पर ध्यान देना आवश्यक है । 
कर्मधारय समास में जहाँ एक पद विशेषण या उपमान होता है और वहीं दूसरा पद विशेष्य या उपमेय होता है ।जैसे- 'श्वेतांबर'  में  'श्वेत' विशेषण है तथा 'अंबर' (वस्त्र)  विशेष्य  इसी प्रकार 'कमलनयन' में 'कमल' उपमान है और नयन 'उपमेय' है। अतः यह दोनों उदाहरण कर्मधारय समास के उदाहरण हैं। 

 बहुव्रीहि समास में समस्त पद  ही किसी संज्ञा के विशेषण का कार्य करता है जैसे - 'चंद्रशेखर' चंद्रमा है जिसके शिखर पर/ चंद्र को शिखर(सिर) पर धारण करता है जो अर्थात 'शिव'।

विग्रह के आधार पर ही कर्मधारय एवं बहुव्रीहि समास में अंतर समझा जा सकता है।  जैैैसे-
नीलकंठ - नीला है जो कंठ (कर्मधारय)
नीलकंठ - नीला है कंठ जिसका अर्थात शिव' (बहुव्रीहि)
लंबोदर - मोटे पेट वाला (कर्मधारय) 
लंबोदर - लंबा है उदर जिसका अर्थात 'गणेश' (बहुव्रीहि)
महात्मा - महान है जो आत्मा (कर्मधारय)
महात्मा - महान आत्मा है जिसकी अर्थात विशेष व्यक्ति (बहुव्रीहि) 
कमलनयन - कमल के समान नयन (कर्मधारय)
कमलनयन - कमल के समान नयन है जिसके 'विष्णु' (बहुव्रीहि)

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